मध्य प्रदेश सरकार का आधार अनिवार्य करवाना RTE के अंतर्गत

निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, २००९ की धारा 12(c) के अंतर्गत गैर अनुदान मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में वंचित समूह एवं कमज़ोर वर्ग के बच्चों को कक्षा 1 या प्री-स्कूल की प्रथम प्रवेशित कक्षा में न्यूनतम 25 प्रतिशत सीटों पर नि:शुल्क प्रवेश का प्रावधान है । इन प्रवेशित बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति शासन द्वारा निर्धारित प्रति बालक व्यय अथवा स्कूल द्वारा ली जाने वाली वास्तविक शुल्क मे से जो भी न्यूनतम हो, का भुगतान जिले से सीधे स्कूल के खातें में किया जाता है । सत्र 2016-2017 से ऑनलाइन लाटरी के माध्यम से ही इस अधिनियम के अंतर्गत प्रवेश प्रारंभ किये गए आवेदन पत्र में आधार नंबर दर्ज करवाने का प्रावधान मध्य प्रदेश सरकार ने घोषित किया है।

आधार कार्ड का मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है किन्तु मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम RTE के तहत योग्य बच्चों की आधार सम्बंधित जानकारी का पंजीकरण अनिवार्य कर देता है । इसकी वजह से कई बच्चे जिनके पास आधार कार्ड नहीं है, वो आधार पंजीकरण के आभाव के कारण RTE के तहत योग्य होते हुए भी अयोग्य हो सकते है । टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार मध्य प्रदेश पहला प्रदेश है जहाँ पर ऐसा कदम उठाया गया है। पत्रिका की एक रिपोर्ट ने दावा किया है की राजस्थान में भी ऐसा फरमान जारी किया गया है। मध्य प्रदेश राज्य शिक्षा केंद्र के निदेशक श्री लोकेश जाटव ने भी इसकी पुष्टि की है और टाइम्स ऑफ़ इंडिया को कहा है की अब से RTE के अंतर्गत गैर अनुदान मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन के लिए आधार नंबर और बायोमेट्रिक देना अनिवार्य कर दिया गया है। मध्य प्रदेश में RTE के अंतर्गत आधार का उपयोग एडमिशन और फीस प्रतिपूर्ति के लिए भी किया जा रहा है जिसकी अधिसूचना पिछले वर्ष ही जारी कर दी गयी थी। इसमें भी धान्द्ली उजागर हुई है।

बच्चे ही नहीं परन्तु उनके अभिभावको की आधार जानकारी की भी जांच की जायेगी एडमिशन प्रक्रिया के दौरान। ऐसा माना जा रहा है की यह कदम RTE में गड़बड़ियो को ख़तम कर देगी और अति आवश्यक पारदर्शिता का आवागमन होगा। आधार मामले की सुनवाई अभी जारी है किन्तु आधार कार्ड का उपयोग सरकारों ने शिक्षा एवं अन्य क्षेत्रों में अनिवार्य किया है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ऐसा निर्णय काफी गंभीर है क्यूंकि आधार की गोपनीयता पर सवाल पहले से ही खड़े हो चुके है। यह ही नहीं, आधार को अनिवार्य करने से एडमिशन प्रक्रिया में सुधार आएगा ऐसा ज़रूरी नहीं है। आधार जानकारी ग्रहण करने से RTE मे घपले कम होंगे इसकी कोई निश्चितता नहीं है। शिक्षा क्षेत्र में RTE के नाम पर होने वाली धान्द्ली का आधार उन्मुख इलाज हमे किसी सही निष्कर्ष पर ले आये यह ज़रूरी नहीं।

अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है की यदि किसी बच्चे का आधार नहीं बना हो तो अभिभावक नजदीकी पंजीयन केंद्र से पंजीयन करवा ले। मध्य प्रदेश सरकार की यह तत्परता देख कर ऐसा लगता है की मानो आधार की विश्वसनीयता पर जो सवाल खड़े हुए है वह कोई मायने ही नहीं रखते । हाल ही मे, आधार जानकारी 500 रुपयों में लीक होने की खबर ने देश को हिला दिया था। इसके बावजूद सरकार ने RTE में ऐसे कदम उठाने में झिझक नहीं दिखाई।

बच्चों या आभिभावाको की सहमती का भी कोई ज़िक्र नहीं किया गया है, जो प्रशासन की एकतरफा सोच को दिखलाता है। आधार और बायोमेट्रिक करवाने से पहले क्या कोई विचार विमर्श अभिभावकों के साथ हुआ था? यह अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया है। निजता को मौलिक अधिकार का दर्जा सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदान कर दिया है। अतः सरकारी अधिकारियों द्वारा आधार जानकारी की मांग गैर संवैधानिक प्रतीत होती है। यह ही नहीं सर्वोच्च न्यायालय ने पहले भी यह आदेश दिया था की आधार बनवाना पूर्णत: “स्वैछिक” है। इन आदेशों को मद्देनज़र रखते हुए यह कहा जा सकता है की मध्य प्रदेश सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंगन कर रही है। प्रदेश सरकार की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है की वह अपने आदेश की पुनः जांच करे ताकि उसमे कोई कानूनी त्रुटी न हो और सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा दिए गए आदेशो का पालन हो।

एडमिशन प्रक्रिया ऑनलाइन कर देना एक अच्छा कदम है किन्तु आधार का अनिवार्य कर देना तुक नहीं बनाता, खासकर जब हनुमान भगवान का भी आधार बन रहा हो। इस बात का ध्यान रखना चाहिए की एक से ज़्यादा आधार कार्ड प्रस्तुत करने वाले इस प्रक्रिया में पकडे जाए। क्या हम ऐसे मायावी जाल में फस चुके है जहाँ हमे RTE जैसे कानूनों को कार्यान्वयन करने के लिए आधार जैसे अकुशल औज़ार की ज़रुरत पड़ेगी? ऐसे कौन से माँ बाप होंगे जो नहीं चाहते की उनके बच्चे अच्छे स्कूलों में पढे? परंतु RTE का पूर्ण लाभ उठाने के लिए अगर आधार की ज़रुरत पड़े तो यह हमे भारत में भ्रष्टाचार का चेहरा दिखलाता है। आधार एवं बायोमेट्रिक के उपयोग पर अभी भी कई सवाल खड़े किये गए है और सुनवाई अभी चल रही है। मध्य प्रदेश सरकार का यह दायित्व बनता है की वह आधार जानकारी मांगने के प्रावधान पर पुनर्विचार करे और ऐसे प्रश्नों का जवाब जल्द से जल्द दे अथवा यह कदम देश के लोकतान्त्रिक मूल्यों पर सीधा वार होगा और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघ मे सहभागी होगा।

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मध्य प्रदेश सरकार का आधार अनिवार्य करवाना RTE के अंतर्गत